उत्तराखण्ड जो अनादिकाल से देव-दानवों सहित तमाम ऋषि-मुनियों और महर्षियों की तपस्थली रही है, जहाँ पर नाना प्रकार की औषधीय वनस्पतियां, सहस्त्रों ताल –सरोवर , जीवन दायनी नदियाँ और अनगिनत प्रसिद्ध आश्रम और सिद्ध मन्दिर अवस्थित हों, जहाँ से माँ यमुना का उद्गम और माँ श्री भगवती गंगा – भागीरथी देवलोक से अवतरित हुई हो, जहाँ पर भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे प्रसिद्ध और ऊँचा ज्योतिर्लिंग केदारनाथ मंदिर हो, जहाँ पर श्री हरि विष्णु जी का दिब्य धाम बदरीनाथ मन्दिर स्थित हो, जहाँ पर पञ्च पाण्डव सदैव विद्यमान रहते हों ,पञ्च केदार और पञ्च बद्री जेसे पवित्र स्थल हो, एसी पावन देवभूमि की यात्रा, अपने आप में एक आलोकिक और दिव्य अनुभूति प्रदान करती है. यहाँ की यात्रा ना केवल शारीरिक-मानसिक अपितु श्रेष्ठ आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं |
यहाँ के प्रमुख चारों धामों की अपनी -अपनी विशेषताएं हें और भक्त अपने-अपने उद्देश्यों के लिए यहाँ की दशकों से यात्रा करने पूण्य अर्जित करते आ रहे हें |
यमनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — ये चार धाम हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। इन चारों धामों की यात्रा को “चार धाम तीर्थ यात्रा” कहा जाता है और यह मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना गया है। पुराणों में इन तीर्थों का विशेष महत्त्व बताया गया है। इनके साथ-साथ भगवन सेम नागराजा और श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा भी अपने आप में विशेष महत्व रखती है .
ग्रंथो में इस प्रकार इन तीर्थो का वर्णन मिलता है –
“यमुनातीरसंस्पर्शात् मुक्तिः सर्वपापतः।
पुण्यं लभ्यते तत्र स्नानात् मोक्षप्रदं परम्॥” – स्कन्द पुराण
“गंगे तव दर्शनात् मुक्तिः,
स्पर्शात् पापनाशनम्।
स्नानात् सर्वफलं प्राप्तं,
गंगे त्वं मुक्तिदायिनी॥” पद्म पुराण
“केदारं शंकरं नित्यं पश्यन्ति भक्तवत्सलम्।
जन्मसप्ततिजन्मानां पापानां नाशनं ध्रुवम्॥” –शिव पुराण
“बदरिकाश्रमं यंति ये नराः श्रद्धयान्विताः।
ते सर्वपापविमुक्तास्ते यान्ति परमां गतिम्॥” –विष्णु पुराण
चार धाम की यात्रा धार्मिक, आध्यात्मिक, और आत्मिक शुद्धि के लिए की जाती है। यह जीवन के चारों पुरुषार्थों यथा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में से मोक्ष की प्राप्ति में सहायक मानी जाती है।
